Sunday , 21 April 2019
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मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रह0 ने कुरान व सुन्नत की रोशनी में इस्लाम के प्रचार में बड़ा किरदार अदा किया -ओसामा

मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रह0 ने कुरान व सुन्नत की रोशनी में इस्लाम के प्रचार में बड़ा किरदार अदा किया -ओसामा

कानपुर:- अल्लाह ने इंसानों को सबसे अच्छा जीव बनाया और अपने बन्दों के निर्देशन व रहनुमाई के लिये अपने नबियों और रसूलों को दुनिया में भेजा , अल्लाह ने अपने प्यारे हबीब अहमद मुजतबा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दरवाजा ए नुबुव्वत व रिसालत को बंद कर दिया। इस्लाम के प्रचार  प्रसार और संरक्षण के लिए अल्लाह ने अपने नेक बन्दों उलेमा  सुलहा  सूफिया और वलियों का चयन फरमाया हिन्दोस्तान में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रह0 ने कुरान व सुन्नत की रोशनी में इस्लाम के प्रचार में बड़ा किरदार अदा किया। ख्वाजा अजमेरी ने इस्लामी शिक्षाओं , अहिंसा, सहिष्णुता, अच्छे आचरण के द्वारा लोगों के दिलों को इस्लाम की रोशनी से जगमगा दिया। यह विचार उत्तराधिकारी व कार्यवाहक काजी ए शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने जामा मस्जिद अशरफाबाद में अपने संबोधन के दौरान व्यक्त किया।

मौलाना ने कहा कि बादशाहों और सुल्तानों ने अपनी श्क्ति के बल पर भारत की भूमि को तो जीत लिया लेकिन भारतवासियों के दिलों पर विजय पाने में वे नाकाम रहे ये काम वलियों व उलमा ने बेहद अच्छे तरीक़े से अंजाम दिया और अपने उच्च नैतिक आचरण व किरदार और निःस्वार्थ सेवा के कारण भारतीयों के दिलों को मोह लिया। यहां के स्थानिय राजा और नवाब अपनी प्रजा पर अत्याचार और जुल्मों के पहाड़ तोड़ रहे थे इन उलमा व वलियों ने अपने प्रयासों से उन्हें मुक्ति दिलाई। हजरत ख्वाजा अजमेरी दीन का ज्ञान प्राप्त करने के लिए उस समय के विश्व प्रसिद्ध स्थान बुखारा व समरकन्द का रुख किया और वहां के बड़े प्रतिष्ठित उलेमा से दीन का अध्ययन कर शिक्षा प्राप्त किया। आप तफ्सीर  हदीस  न्यायशास्त्र(फिक़ह) कलाम तथा अन्य ज्ञान में सही कौशल प्राप्त करने के बाद आध्यात्मिक ज्ञान (रूहानी इल्म) के लिये आज़िम ए सफर हुए। इराक़ व हजाज मुक़द्दस के बुजुर्गांने दीन से आध्यात्मिकता से संतृप्ति हासिल करते हुए नीशापुर के क़स्बा हारून पहुंचे जहां हजरत ख्वाजा उस्मान हारूनी रह0 की आध्यात्मिक (रूहानी) व इरफानी मज्लिसों में शिरकत की और उनके हाथों पर बैअत की। हजरत ख्वाजा उस्मान हारूनी रह0 ने आप पर विशेष ध्यान दिया। सभी तरह के अध्ययन के बाद हजरत ख्वाजा अजमेरी विशेष संकेत (इशारह ए ग़ैबी) पाकर भारत के क्षेत्र अजमेर में आये। उस समय जबकि वहाँ पृथ्वीराज की सरकार थी जिसकी सरकार में गरीबों व कमज़ोरों पर भारी अत्याचार के पहाड़ तोड़े जा रहे थे आपने आकर निर्बलों की सहायता करने के साथ उन्हें इस्लाम की दावत दी। आपकी शिक्षा, नसीहत और सुधार के उपदेश से हजारों लोगों को इस्लाम की दौलत नसीब हुई। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की जा़त(व्यक्तित्व) से लाखों इंसानों ने इस्लाम को अपनाया और सिलसिला ए चिश्तिया से जुड़े आपके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मुरीदीन ने पूरे भारत में इस्लाम के प्रचार का कारनामा अंजाम दिया जिसे इस्लाम के इतिहास में महत्व की दृष्टि से देखा जाता है। आपके ही विचारों से प्रभावित कुरान व सुन्नत के सच्चे अनुयायी उलमा देवबन्द आपके मिशन को आगे बढ़ाने में पूरी तरह से दिन रात लगे हुए हैं। एक तरफ मदरसों के उलमा अपने शैक्षिक कार्यों और नसीहत वाले उपदेशों के जरिये इस्लाम के प्रचार का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर खानक़ाहों के द्वारा भटके हुए इंसानों को सीधे रास्ते पर लाने के लिए उनकी तहारत नफस व तज्किया बातिन का कार्य कर रहे हैं।
मौलाना ने कहा कि पूरी दुनिया में औलिया व सूफिया ने इस्लाम के प्रचार व प्रसार में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है वह दिन की रोशनी की तरह साफ है जहां मुस्लिम बादशाहों और सेनापतियों ने अपनी जीत के जरिये झंडा बुलंद किया वहीं औलिया ए इस्लाम ने अपने आध्यात्मिक कार्यों से लोगों के दिलों को जीत लिया। भारत में मुहम्मद बिन क़ासिम से लेकर शहाबुद्दीन गौरी तक सभी विजेताओं का मकसद जुल्म व उत्पीड़न में दबी मानवता को अन्याय से मुक्ति और सीधी राह दिखाना था। उनके साथ औलिया, सूफियों और आलिमों के काफिले भी एक के बाद दूसरे आते रहे और मानवता की सहानुभूति के साथ समाज सेवा और इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं नबी ए रहमत की रहमत वाले जीवन और सीरत से परिचित कराने में व्यस्त रहे। लेकिन जब इन राजाओं का क्षेत्र विस्तार हो गया और उनके अंदर दुनिया से प्रेम , पदों की लालच पैदा होने लगी और आपसी खींचतान और गृहयुद्ध होने लगे तब भी उलमा व सूफी दीन के प्रसार में व्यस्त रहे इन हस्तियों के कारण ही आज भारत में इतनी बड़ी संख्या में मुसलमान मौजूद हैं।

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